सूर्य केवल पृथ्वी को ऊर्जा और जीवन देने वाला खगोलीय पिंड ही नहीं है, बल्कि वह अब वैज्ञानिकों को प्रकृति की सबसे बुनियादी शक्तियों में से एक—गुरुत्वाकर्षण—को नए सिरे से समझने में भी मदद कर रहा है। असम के तेजपुर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सूर्य के आंतरिक गतियों और ऊर्जा प्रवाह का अध्ययन कर गुरुत्वाकर्षण से जुड़ी एक नई अवधारणा की जांच की है।
तेजपुर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य के भीतर होने वाली गतिविधियों पर गुरुत्वाकर्षण में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों का भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। शोध में पाया गया कि गुरुत्वाकर्षण में मामूली परिवर्तन से सूर्य के भीतर ऊर्जा के संचार की गति और स्थिरता में उल्लेखनीय बदलाव आ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे बदलावों से तरंगों की गति और संरचनात्मक स्थिरता में 55 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है।
यह अध्ययन सूर्य के आंतरिक ढांचे और उसकी ऊर्जा उत्पन्न करने की प्रक्रिया को समझने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सूर्य, जो हमारे सौरमंडल का मुख्य ऊर्जा स्रोत है, उसके भीतर छिपी भौतिक प्रक्रियाओं को समझना न केवल खगोल विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे अन्य तारों की संरचना और व्यवहार को समझने में भी मदद मिल सकती है।
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शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन पारंपरिक गुरुत्वाकर्षण सिद्धांतों को चुनौती देने के साथ-साथ उन्हें और अधिक परिष्कृत करने का अवसर प्रदान करता है। सूर्य के भीतर होने वाली गतियों का विश्लेषण कर वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि गुरुत्वाकर्षण वास्तव में किस तरह ऊर्जा के प्रवाह और खगोलीय पिंडों की स्थिरता को प्रभावित करता है।
तेजपुर विश्वविद्यालय का यह शोध न केवल भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर खगोल भौतिकी और गुरुत्वाकर्षण से जुड़े अध्ययनों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
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