छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र, जिसे कभी भारत का “रेड कॉरिडोर” कहा जाता था, अब नक्सल हिंसा के साये से बाहर निकलकर शांति और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। लंबे समय तक जंगलों और गांवों में माओवादी उग्रवादियों का आतंक छाया रहा, लेकिन अब हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत अब वामपंथी उग्रवाद से काफी हद तक मुक्त हो चुका है। इस बदलाव के पीछे सुरक्षा बलों की समन्वित रणनीति और स्थानीय सहयोग को अहम माना जा रहा है। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि नक्सल नेतृत्व का पतन और उनके कैडर की संख्या में भारी कमी इस परिवर्तन की सबसे बड़ी वजह है।
डीआरजी, एसटीएफ, बस्तर फाइटर्स, कोबरा, सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी जैसी सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर लगातार अभियान चलाए। इससे नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने खत्म हो गए और कई बड़े नेता मारे गए या आत्मसमर्पण करने को मजबूर हुए।
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पहले नक्सली जमीन और जंगल के अधिकार के नाम पर लोगों को अपने साथ जोड़ते थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने हिंसा, वसूली और जबरन भर्ती का रास्ता अपना लिया। इससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया था। अब सरकारी योजनाओं और पुलिस के भरोसेमंद प्रयासों से लोगों का विश्वास वापस लौटा है।
विशेष बलों में स्थानीय युवाओं की भर्ती ने भी बड़ी भूमिका निभाई। उन्हें इलाके की भौगोलिक और सामाजिक समझ होने के कारण अभियानों में सफलता मिली।
आज बस्तर में विकास कार्य, रोजगार योजनाएं और पर्यटन जैसी गतिविधियां बढ़ रही हैं। लोग अब भय के बजाय शांति और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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