राजस्थान में होने वाले शहरी स्थानीय निकाय चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए महज नगर निकायों में जीत-हार का चुनाव नहीं हैं। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इन्हें संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं के मनोबल, जातीय समीकरणों, युवाओं के रुझान और हाल में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के राजनीतिक असर को परखने के अवसर के रूप में देख रहा है।
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने राजस्थान निकाय चुनाव को लेकर दिनभर बैठकें कीं। सामान्य तौर पर ऐसे स्थानीय चुनावों की जिम्मेदारी राज्य संगठन पर होती है, लेकिन इस बार केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता काफी अधिक दिखाई दे रही है। पूर्व उत्तर प्रदेश सांसद हरीश द्विवेदी को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री रविंद्र इंद्रजीत सिंह समेत छह सह-प्रभारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि बीजेपी हर चुनाव को गंभीरता से लेती है। उनका कहना है कि पार्टी किसी एक आंदोलन की प्रतिक्रिया में चुनाव नहीं लड़ती, बल्कि उसका संगठन पूरे वर्ष सक्रिय रहता है।
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हालांकि, पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि राजस्थान चुनावों से यह समझने में मदद मिलेगी कि जंतर-मंतर आंदोलन का युवाओं और मतदाताओं पर कितना प्रभाव पड़ा है। सीजेपी के आंदोलन ने जुलाई में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद राजस्थान में जर्जर स्कूल भवनों जैसे स्थानीय मुद्दों को भी राजनीतिक बहस से जोड़ दिया है।
राजस्थान के 309 शहरी केंद्रों में होने वाले चुनाव में 1.4 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। इनमें करीब 26 प्रतिशत युवा मतदाता हैं। इसलिए बीजेपी के लिए यह चुनाव युवा मतदाताओं के रुझान को समझने का शुरुआती मौका भी माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को राज्य की 10 प्रमुख नगर निकायों में बड़े रोड शो करने की जिम्मेदारी दी गई है। वह शनिवार को भीलवाड़ा से अभियान की शुरुआत करेंगे और इसके बाद उदयपुर में रोड शो करेंगे। इन चुनावों को उनके करीब ढाई साल के शासन के प्रदर्शन की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।
बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व निकाय चुनावों के साथ आगामी पंचायत चुनावों पर भी नजर रख रहा है। पार्टी का लक्ष्य संगठन की ताकत, चुनावी रणनीति और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता का आकलन करना है।
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