राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो समाज अपने शिक्षकों का सम्मान करता है, वह वास्तव में प्रगतिशील समाज होता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता, कौशल विकास और उद्यमिता देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को ज्ञान की शक्ति बनने के साथ-साथ दुनिया की ‘स्किल कैपिटल’ के रूप में स्थापित करना देश की प्राथमिकता है।
उन्होंने ज्ञान को शक्ति का सबसे बड़ा स्रोत बताते हुए कहा कि शिक्षा लोगों को स्वतंत्र रूप से सोचने, सही निर्णय लेने और राष्ट्र की प्रगति में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बनाती है। राष्ट्रपति ने समर्पित शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की अग्रिम पंक्ति में खड़े कर्मयोगी बताया। उन्होंने महिला अधिकारों और शिक्षा के विस्तार में सावित्रीबाई फुले के महत्वपूर्ण योगदान को भी याद किया।
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समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किए। देश के 27 राज्यों, सात केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के छह संगठनों से चयनित 48 स्कूली शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा, उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षकों एवं संकाय सदस्यों को भी राष्ट्रीय पुरस्कार दिए गए। इनमें केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों के 12 शिक्षक, राज्य विश्वविद्यालयों के पांच शिक्षक तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों के चार शिक्षक शामिल हैं। इनमें सरकारी और निजी संस्थानों के शिक्षक भी शामिल रहे।
कार्यक्रम में प्रत्येक पुरस्कार विजेता के उत्कृष्ट कार्यों पर आधारित लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किए गए।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी, शिक्षा राज्य मंत्री जयंत सिंह और डॉ. सुकांत मजूमदार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. राधाकृष्णन देश के उपराष्ट्रपति और बाद में राष्ट्रपति रहे।
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