तेलंगाना में विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही सोमवार को राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के एमएलसी टाटा मधुसूदन पर विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी करने का आरोप है। हैदराबाद पुलिस ने मंगलवार, 8 सितंबर को सुबह करीब 7 बजे उन्हें गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद मधुसूदन को नारायणगुडा पुलिस थाने ले जाया गया। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत के लिए हैदराबाद के नामपल्ली स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।
मामले में विधानसभा अध्यक्ष के विशेष कार्याधिकारी पोल्लेपल्ली वेंकटेशम की शिकायत पर कार्रवाई की गई। शिकायत के अनुसार, 7 सितंबर को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मधुसूदन ने पत्रकारों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कर्मियों, विधानसभा कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में अध्यक्ष का कथित तौर पर अपमान किया।
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पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 और 3(5) के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि मधुसूदन ने दलित समुदाय से आने वाले अध्यक्ष को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के विधानसभा नहीं आने को लेकर भी कथित टिप्पणी की।
हालांकि, मधुसूदन ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को सत्तारूढ़ कांग्रेस ने गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी नाराजगी पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर थी, जिन्होंने कथित तौर पर उनके साथ धक्का-मुक्की की और बीआरएस की महिला सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि वह अध्यक्ष पद का सम्मान करते हैं और किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो माफी मांगने को तैयार हैं।
बीआरएस के एक अन्य एमएलसी एन. नवीन कुमार रेड्डी को भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारी का कॉलर पकड़ने और धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
इस बीच, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधान परिषद के सभापति गुट्टा सुखेंद्र रेड्डी से मधुसूदन को तत्काल अयोग्य घोषित कर सदन से निष्कासित करने की मांग की है। बीआरएस ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए गिरफ्तारियों के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
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