केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार (4 फरवरी 2026) को कनाडा के 24 प्रमुख विश्वविद्यालयों के शीर्ष प्रशासकों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उन्हें भारत में अपने अंतरराष्ट्रीय कैंपस स्थापित करने का आग्रह किया। यह प्रतिनिधिमंडल भारत में कनाडा के राजदूत क्रिस्टोफर कूटर के नेतृत्व में भारत आया है। इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच उच्च शिक्षा, शोध सहयोग और शैक्षणिक आदान-प्रदान को मजबूत करना था।
बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में उभर रहा है और यहां विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत में कैंपस स्थापित करने से भविष्य के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने में मदद मिलेगी और शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा।
कनाडाई विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा विशेष रूप से शोध सहयोग, अकादमिक एक्सचेंज और ट्रांसनेशनल शिक्षा के टिकाऊ मॉडल विकसित करने के अवसरों का पता लगाने के लिए आयोजित किया गया है। यूनिवर्सिटीज कनाडा के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल गोवा, नई दिल्ली और गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) में भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र, सरकार और उद्योग जगत के नेताओं से मुलाकात कर रहा है।
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शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई देश में ही उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से भारतीय छात्रों को विदेश जाने की आवश्यकता कम होगी और देश में ही विश्वस्तरीय शिक्षा का लाभ मिलेगा।
यह कदम भारत और कनाडा के बीच शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल शिक्षा क्षेत्र मजबूत होगा बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध भी और गहरे होंगे।
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