दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (23 जनवरी, 2026) को कथित कैश-फॉर-क्वेरी घोटाले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति देने के मुद्दे पर लोकपाल को दो महीने का अतिरिक्त समय दिया है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इसके बाद समय बढ़ाने का कोई और अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेतरपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने कहा, “निपटारे की अवधि दो महीने के लिए बढ़ाई जाती है, लेकिन यह स्पष्ट किया जाता है कि आगे समय बढ़ाने का कोई अनुरोध स्वीकार नहीं होगा।”
सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश वकीलों ने लोकपाल द्वारा समय बढ़ाने के अनुरोध का विरोध नहीं किया। इससे पहले, 19 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने लोकपाल के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें सीबीआई को महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी दी गई थी। अदालत ने लोकपाल को लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 20 के तहत कानून के अनुसार नए सिरे से विचार करने और एक महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
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अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा था कि लोकपाल ने अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया से “स्पष्ट विचलन” किया है और कानून के प्रावधानों की व्याख्या व समझ में त्रुटि की है।
कैश-फॉर-क्वेरी मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया है कि महुआ मोइत्रा ने एक व्यवसायी से नकद और उपहार लेने के बदले लोकसभा में सवाल पूछे। महुआ मोइत्रा पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से दो बार की सांसद हैं।
यह फैसला महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने 12 नवंबर 2025 के लोकपाल के आदेश को चुनौती दी थी। सीबीआई ने जुलाई 2025 में इस मामले में लोकपाल को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। एजेंसी ने 21 मार्च 2024 को लोकपाल के संदर्भ पर महुआ मोइत्रा और व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि महुआ मोइत्रा ने रिश्वत लेकर अपने संसदीय विशेषाधिकारों से समझौता किया और लोकसभा लॉगिन क्रेडेंशियल साझा कर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला।
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