केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अरविंद केजरीवाल द्वारा जज को मामले से हटाने (रिक्यूजल) की मांग वाली याचिका का कड़ा विरोध किया है। सीबीआई ने अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया में कहा कि यह याचिका पूरी तरह "अनुमानों और अटकलों" पर आधारित है और इसमें न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए आवश्यक कानूनी आधार नहीं है।
सीबीआई ने स्पष्ट किया कि अदालत की किसी अंतरिम टिप्पणी या आदेश से असहमति जताना जज को हटाने का वैध कारण नहीं हो सकता। एजेंसी ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की याचिकाओं को स्वीकार किया जाता है, तो इससे "बेंच हंटिंग" यानी अपनी पसंद के जज चुनने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है।
सीबीआई ने यह भी कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर संदेह करने के लिए ठोस और स्पष्ट प्रमाण जरूरी होते हैं, जबकि केजरीवाल की याचिका में ऐसा कोई मजबूत आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है। एजेंसी का मानना है कि इस तरह की याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न करती हैं और मामलों के निष्पक्ष निपटारे में देरी का कारण बनती हैं।
और पढ़ें: BRS ने केरल प्रचार को लेकर सीएम रेवंत रेड्डी पर साधा निशाना, अधूरे वादों और भ्रष्टाचार के आरोप
गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने मामले की सुनवाई कर रहे जज को हटाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। इस पर अब सीबीआई ने अपना पक्ष रखते हुए अदालत से याचिका को खारिज करने की मांग की है।
इस मामले ने न्यायिक प्रक्रिया, निष्पक्षता और कानूनी मानकों को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है, जिसमें अदालत के अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
और पढ़ें: बीजेपी और EC ने भारतीय लोकतंत्र को बनाया क्रूर मज़ाक: TMC ने SIR विवाद पर की तीखी टिप्पणी