पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों को मतदाता सूची संशोधन (SIR) के दौरान कथित रूप से “एंटी-सोशल तत्वों” ने बीडीओ कार्यालय में लगभग 9 घंटे तक घेर लिया। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना कालियाचक क्षेत्र में हुई, जहां अधिकारियों पर मतदाता सूची से नाम हटाने के आरोप लगाए गए।
गुरुवार को निर्वाचन आयोग ने इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को जांच सौंप दी। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया गया, जिसमें कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए चुनाव से पहले बंगाल को “सबसे ध्रुवीकृत” राज्य बताया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र शासित एजेंसी द्वारा तुरंत जांच शुरू करने का आदेश भी दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन की “पूर्ण विफलता” और विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान अधिकारियों पर हुए “निंदनीय” घेराव और हमले पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए कि पर्याप्त केंद्रीय बल की मांग की जाए और उन्हें उन सभी स्थानों पर तैनात किया जाए, जहां न्यायिक अधिकारी मतदाता सूची के विरोधों का निपटारा कर रहे हैं।
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मालदा के अधिकारियों को लगभग आधी रात को सुरक्षा बलों ने सुरक्षित बचाया। घटना के संबंध में अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य आरोपी की तलाश जारी है। इस घटना ने आगामी विधानसभा चुनावों के बीच कानून और व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और राज्य में चुनावी सुरक्षा की संवेदनशीलता को उजागर किया है।
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