देश में होने वाली जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत मैदान में काम कर रहे गणनाकर्मियों (एन्युमरेटर) को कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें भीषण गर्मी, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्याएं और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं प्रमुख हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है जिसमें फील्ड में काम कर रहे कर्मियों के अनुभवों का हवाला दिया गया है।
जनगणना की यह कवायद वास्तविक समय में निगरानी के लिए तैयार की गई एक डिजिटल प्रणाली के माध्यम से की जा रही है। सरकार ने इस बार जनगणना को पूरी तरह तकनीक-आधारित बनाने का दावा किया है, जिससे आंकड़े तुरंत दर्ज हो सकें और उनकी निगरानी केंद्रीय स्तर पर संभव हो सके। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम कर रहे गणनाकर्मियों का कहना है कि वास्तविक परिस्थितियां इस डिजिटल ढांचे की अपेक्षाओं से मेल नहीं खातीं।
फील्ड वर्करों के अनुसार, गर्मी के मौसम में घर-घर जाकर सर्वेक्षण करना शारीरिक रूप से बेहद थकाऊ साबित हो रहा है। कई इलाकों में तेज धूप और उच्च तापमान के कारण लंबे समय तक काम करना मुश्किल हो जाता है, जिससे गणनाकर्मियों की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है।
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इसके अलावा, दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भी एक बड़ी बाधा बनकर सामने आई है। चूंकि पूरी प्रक्रिया डिजिटल उपकरणों और एप्लिकेशन के माध्यम से संचालित की जा रही है, नेटवर्क की कमी के कारण डेटा को वास्तविक समय में अपलोड करना संभव नहीं हो पाता। इससे गणनाकर्मियों को अतिरिक्त समय और प्रयास लगाना पड़ रहा है, और कई बार उन्हें बेहतर नेटवर्क वाले स्थानों की तलाश में भटकना पड़ता है।
सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी गणनाकर्मियों के लिए एक गंभीर मुद्दा बनी हुई हैं। घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने के दौरान, विशेषकर दूरदराज या असुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में, फील्ड वर्करों को अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकाएं रहती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन व्यावहारिक कठिनाइयों के साथ-साथ पर्यवेक्षी स्तर से मिलने वाले निर्देश भी डेटा संग्रह की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। फील्ड वर्करों का कहना है कि कई बार पर्यवेक्षकों के निर्देश जमीनी हकीकत के अनुरूप नहीं होते, जिससे काम में तालमेल बिठाना कठिन हो जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखते हुए रिपोर्ट तैयार करने वाली विजयता सिंह ने जनगणना कार्य में आ रही इन चुनौतियों को विस्तार से दर्ज किया है। उनकी रिपोर्ट बताती है कि कैसे तकनीकी उन्नयन के बावजूद जमीनी वास्तविकताएं जनगणना जैसे बड़े राष्ट्रीय अभियान की सफलता के लिए एक अहम कारक बनी हुई हैं। आने वाले महीनों में जनगणना 2027 की तैयारियां और तेज होने की उम्मीद है, लेकिन फील्ड स्तर पर सामने आ रही इन समस्याओं का समाधान किए बिना प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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