केंद्र सरकार मणिपुर में लोकप्रिय सरकार की बहाली को लेकर सक्रिय हो गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी को एक वर्ष पूरा करने वाला है और इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र स्तर पर बातचीत और समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हुआ है। फिलहाल मणिपुर विधानसभा निलंबित अवस्था (सस्पेंडेड एनिमेशन) में है।
पिछले एक सप्ताह के दौरान मणिपुर की सुरक्षा स्थिति और राजनीतिक भविष्य को लेकर दो अहम समीक्षा बैठकें की गईं। इन बैठकों की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने की। 2 जनवरी को नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला भी मौजूद थे। इस बैठक में राष्ट्रपति शासन को आगे बढ़ाने के “फायदे और नुकसान” पर विस्तार से चर्चा की गई, हालांकि किसी अंतिम फैसले की घोषणा नहीं की गई।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इन बैठकों में राज्य में सुरक्षा व्यवस्था, अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई। केंद्र सरकार यह आकलन कर रही है कि मौजूदा हालात में निर्वाचित सरकार की बहाली संभव है या राष्ट्रपति शासन को और आगे बढ़ाना पड़ेगा।
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हालांकि, मणिपुर में सभी समुदाय इस मुद्दे पर एकमत नहीं हैं। कूकी-जो (Kuki-Zo) समुदाय से जुड़े संगठनों ने राज्य में सरकार गठन का विरोध किया है और वे अलग प्रशासन या पृथक व्यवस्था की अपनी मांग पर अडिग बने हुए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में एक संयुक्त सरकार उनकी सुरक्षा और हितों की गारंटी नहीं दे सकती।
केंद्र सरकार के सामने चुनौती यह है कि एक ओर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल किया जाए, वहीं दूसरी ओर राज्य में शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जाए। मणिपुर पिछले कई महीनों से जातीय हिंसा और तनाव से जूझ रहा है, जिसके चलते फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।
आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की समीक्षा बैठकों और राजनीतिक परामर्श के आधार पर यह तय होगा कि मणिपुर में लोकप्रिय सरकार की वापसी होगी या राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाई जाएगी।
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