चीन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में सहयोग और संवाद की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि व्यापार और टैरिफ युद्धों में किसी की जीत नहीं होती। मंगलवार (20 जनवरी, 2026) को विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की वार्षिक बैठक में विशेष संबोधन के दौरान चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग ने यह बात कही।
अपने भाषण में हे लिफेंग ने कहा कि चीन दुनिया के लिए अपने दरवाजे और अधिक खोलने जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में चीन अपने बाजार का विस्तार करेगा, खासकर सेवा क्षेत्र में, ताकि वैश्विक निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात में टकराव की जगह सहयोग और संवाद ही स्थायी समाधान है।
चीन के उप-प्रधानमंत्री ने वैश्वीकरण पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “आर्थिक वैश्वीकरण पूरी तरह परिपूर्ण नहीं है, लेकिन देश इसे पूरी तरह नकार कर आत्म-अलगाव की ओर नहीं जा सकते।” उनके अनुसार, वैश्वीकरण ने कई देशों को विकास के अवसर दिए हैं और इससे पीछे हटना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह होगा।
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हे लिफेंग ने चीन की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2026 में चीन ने घरेलू मांग को अपनी आर्थिक नीति के केंद्र में रखा है। इसका उद्देश्य उपभोग को बढ़ावा देना है, ताकि आर्थिक वृद्धि को संतुलित और टिकाऊ बनाया जा सके। इसके साथ ही चीन अपनी उत्पादन क्षमता और औद्योगिक ताकत को भी बनाए रखेगा।
उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में संरक्षणवाद और टैरिफ बढ़ाने की नीति समस्याओं को और गहरा करती है। चीन का मानना है कि खुले बाजार, बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था और आपसी विश्वास से ही वैश्विक समृद्धि संभव है। उनके इस बयान को मौजूदा वैश्विक व्यापार तनावों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
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