कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के अंतिम से पहले दिन भारत के लिए बेहद अहम रहने वाला है। शनिवार को 10 भारतीय मुक्केबाज़ अपने-अपने वर्ग के फाइनल मुकाबलों में उतरेंगे और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास करेंगे। भारतीय दल की नजर एक साथ 10 स्वर्ण पदकों पर टिकी हुई है।
फाइनल में उतरने वाले भारतीय मुक्केबाज़ों में प्रीति पवार, लवलीना बोरगोहेन, जैसमीन लांबोरिया समेत कई प्रमुख खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों से भारत को स्वर्ण पदक की बड़ी उम्मीदें हैं।
अब तक भारत 23 पदक अपने नाम कर चुका है, जिनमें 5 स्वर्ण पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा और यश वीर सिंह ने भाला फेंक स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को डबल पोडियम दिलाया। वहीं तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में डेकाथलॉन स्पर्धा में भारत का पहला पदक है।
और पढ़ें: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एंटी पेपर लीक संशोधन कानून को दी मंजूरी, अब 10 साल तक की जेल का प्रावधान
जूडो में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा और कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत को पहला स्वर्ण दिलाया। इसके बाद हर्ष सिंह ने भी अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत की उपलब्धियों में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया। वहीं यामिनी मौर्य महिला 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में पहुंचीं, लेकिन उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
प्रतियोगिता के अंतिम से पहले दिन भारतीय खिलाड़ियों के पास पदकों की संख्या बढ़ाने का सुनहरा अवसर है। खासकर मुक्केबाजी में एक साथ 10 फाइनल मुकाबलों ने भारत की स्वर्ण पदकों की उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है। यदि भारतीय मुक्केबाज़ उम्मीदों पर खरे उतरते हैं तो पदक तालिका में भारत की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
और पढ़ें: सीजेपी प्रदर्शन: भड़काऊ कंटेंट पर यूट्यूबर और इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में दिल्ली पुलिस