देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। जुलाई 2026 में जीएसटी संग्रह बढ़कर 2,11,205 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 15.4 प्रतिशत अधिक है। जुलाई 2025 में जीएसटी संग्रह 1,83,065 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। यह वृद्धि देश में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, बेहतर कर अनुपालन और आयात में बढ़ोतरी का संकेत मानी जा रही है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू लेनदेन से प्राप्त सकल जीएसटी राजस्व 1,44,695 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू बाजार में बढ़ती खपत और कारोबार में तेजी के कारण कर संग्रह में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
जुलाई के दौरान आयात पर वसूले गए जीएसटी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। आयात से प्राप्त जीएसटी संग्रह 66,511 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 28.8 प्रतिशत अधिक है। आयात से मिलने वाले कर राजस्व में इस तेज वृद्धि ने कुल मासिक जीएसटी संग्रह को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी संग्रह में लगातार बढ़ोतरी से यह संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है। बेहतर कर अनुपालन, डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार और कर प्रशासन में पारदर्शिता जैसे कदमों का भी सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। सरकार द्वारा कर चोरी पर सख्ती और तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली ने भी राजस्व संग्रह को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।
सरकार के लिए बढ़ता जीएसटी संग्रह बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण योजनाओं और विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण में सहायक साबित हो सकता है। वित्त मंत्रालय को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में भी आर्थिक गतिविधियों में सुधार के साथ कर संग्रह की यह सकारात्मक प्रवृत्ति जारी रहेगी, जिससे राजकोषीय स्थिति और अधिक मजबूत होगी।
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