दिल्ली सरकार ने राजधानी में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली निजी विश्वविद्यालय विधेयक को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस विधेयक को स्वीकृति दी गई। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि अब इस विधेयक को दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा और पारित होने के बाद राजधानी में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
आशीष सूद ने कहा कि वर्षों से दिल्ली के छात्र गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए देश के अन्य राज्यों या विदेशों का रुख करते रहे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। सरकार का उद्देश्य अब ऐसी सुविधाएं दिल्ली में ही उपलब्ध कराना है, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा अपने शहर में मिल सके।
विधेयक के अनुसार, निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए संस्थान को जमीन स्वयं खरीदनी होगी या कम से कम 30 वर्ष की वैध लीज होनी चाहिए। सरकार किसी भी निजी विश्वविद्यालय को भूमि उपलब्ध नहीं कराएगी। साथ ही, प्रत्येक पाठ्यक्रम में दिल्ली के छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी और इन पर प्रवेश दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसार होगा।
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सरकार ने फीस नियंत्रण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक समिति गठित करने का भी प्रावधान किया है। सभी निजी विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अन्य वैधानिक नियामक संस्थाओं के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
विधेयक के तहत विश्वविद्यालय केवल यूनिटरी मॉडल पर संचालित होंगे और वे अन्य कॉलेजों को संबद्धता नहीं दे सकेंगे। हालांकि आवश्यकता के अनुसार दिल्ली में अतिरिक्त परिसर, क्षेत्रीय केंद्र और अध्ययन केंद्र स्थापित किए जा सकेंगे।
इसके अलावा, उच्च शिक्षा मंत्री विश्वविद्यालय के 'विजिटर' होंगे, जिन्हें निरीक्षण कराने, जानकारी मांगने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक निर्देश जारी करने का अधिकार होगा। सरकार का मानना है कि यह विधेयक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देगा और राष्ट्रीय राजधानी में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराएगा।
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