तिरुचिरापल्ली में आयोजित ‘एआई कॉन्क्लेव 2026’ में विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस तेजी से बदलते दौर में शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। CARE कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 17 वर्षीय टेक उद्यमी और AI Realm Technologies के संस्थापक राउल जॉन आजू ने कहा कि एआई भले ही अभी विकास के चरण में है, लेकिन इसने मानव सोच और वास्तविकता की समझ को चुनौती देना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीकें लंबे समय से हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा हैं। जब भी कोई व्यक्ति वीडियो देखता है, फोटो साझा करता है या इंटरनेट पर कुछ खोजता है, एआई उसके व्यवहार और रुचियों को ट्रैक करता है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में जेनरेटिव एआई ने व्यापक चर्चा और भ्रम दोनों पैदा किए हैं, क्योंकि यह मानव जैसी प्रतिक्रियाएं और सामग्री तैयार कर सकता है।
राउल जॉन आजू ने कहा कि मानव मस्तिष्क और एआई कुछ समान तकनीकों का उपयोग करते हैं, लेकिन बड़ा अंतर यह है कि वर्तमान समय में एआई पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह वास्तविकता और भ्रम के बीच की रेखा को धुंधला कर रहा है।
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उन्होंने शिक्षा प्रणाली पर जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक पाठ्यक्रम कई वर्षों पीछे चल रहा है और उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई शिक्षकों की जगह नहीं ले रहा है, बल्कि वे शिक्षक आगे बढ़ेंगे जो एआई का उपयोग करना सीखेंगे।
विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि आने वाले समय में शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, तकनीक-आधारित और उद्योग-उन्मुख बनाना होगा ताकि छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।
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