मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि यदि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (ई-20) का मिश्रण नहीं किया गया होता, तो भारत में पेट्रोल की कीमत लगभग 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण नीति ने न केवल देश की तेल आयात पर निर्भरता कम की है, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी महंगे ईंधन से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 135 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। ऐसे हालात में पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता था। हालांकि, घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण, कच्चे तेल की उपलब्धता और तेल विपणन कंपनियों की खरीद रणनीति के कारण उपभोक्ताओं को पेट्रोल लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराया गया।
सरकार ने अपने बयान में कहा कि हर लीटर पेट्रोल में 20 प्रतिशत घरेलू एथेनॉल पहले से तय स्थिर कीमतों पर खरीदा गया था, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी का असर काफी हद तक कम हुआ। इसके परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को संकट के चरम दौर में लगभग 30 रुपये प्रति लीटर की बचत हुई।
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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य केवल सस्ता ईंधन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव से भारतीय उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और ईंधन पर होने वाले खर्च का बड़ा हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था के भीतर बनाए रखना है।
ई-20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान होने के दावों पर भी सरकार ने सफाई दी। सरकार के अनुसार, एआरएआई, सियाम, इंडियन ऑयल और वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक परीक्षण किए गए, जिनमें इंजन की क्षमता, प्रदर्शन या पुर्जों पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया। हालांकि, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि वर्ष 2016 से पहले निर्मित और बीएस-3 मानकों वाले कुछ वाहनों में रबर के कुछ पुर्जों और गैस्केट को बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है।
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