पूर्व भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–SIR) अभियान को लेकर चुनाव आयोग से जुड़े फॉर्मों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह टिप्पणी उन्होंने तब की, जब चुनाव आयोग ने उन्हें मतदाता पहचान सत्यापन के तहत एक बैठक में उपस्थित होकर अपनी पहचान साबित करने का नोटिस भेजा।
एडमिरल प्रकाश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि यदि एसआईआर फॉर्म लोगों द्वारा दी गई जानकारी को सही ढंग से दर्शाने में असमर्थ हैं, तो उन्हें संशोधित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तीन बार उनके घर आए थे और यदि अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता थी, तो वे उसी समय पूछ सकते थे। उन्होंने कहा कि वे और उनकी पत्नी क्रमशः 82 और 78 वर्ष के हैं और उन्हें 18 किलोमीटर दूर, दो अलग-अलग तारीखों पर उपस्थित होने को कहा गया है।
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने चुनाव आयोग की आलोचना की और इसे एक बड़ी प्रशासनिक चूक बताया। एडमिरल अरुण प्रकाश के चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने विमानवाहक पोत से उड़ान भरने वाले फाइटर स्क्वाड्रन, एक नौसैनिक एयर स्टेशन और INS विराट सहित चार युद्धपोतों की कमान संभाली थी।
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जब एक सोशल मीडिया यूज़र ने सुझाव दिया कि BLO को उनके घर भेजकर दस्तावेज़ सत्यापित किए जाएं, तो एडमिरल प्रकाश ने विनम्रता से कहा कि वे किसी भी तरह का “विशेषाधिकार” नहीं चाहते। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद 20 वर्षों में उन्होंने कभी किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं की।
उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने सभी आवश्यक एसआईआर फॉर्म भरे थे और उन्हें यह देखकर संतोष हुआ कि उनके नाम गोवा की ड्राफ्ट मतदाता सूची 2026 में शामिल थे। इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि वे चुनाव आयोग के नोटिस का पालन करेंगे।
1971 के युद्ध के दौरान, भारतीय वायुसेना के साथ उड़ान भरते हुए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दीं।
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