उत्तराखंड पुलिस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ की पहचान के लिए शनिवार (10 जनवरी, 2026) को एफआईआर दर्ज की है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने के एक दिन बाद की गई। एफआईआर देहरादून के वसंत विहार थाना में दर्ज की गई है।
यह एफआईआर पद्म भूषण से सम्मानित पर्यावरणविद् अनिल प्रकाश जोशी द्वारा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को दी गई शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। अपनी शिकायत में अनिल प्रकाश जोशी ने कहा है कि अंकिता भंडारी की हत्या में शामिल अपराधियों को दोषी ठहराया जा चुका है, लेकिन अब भी यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि मामले से जुड़े कुछ अहम सबूतों को छिपाया गया या नष्ट किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि अपराध में किसी अज्ञात व्यक्ति की भूमिका की जांच आवश्यक है, जिसे ‘वीआईपी’ बताया जा रहा है। इस कथित व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्ष जांच के बिना अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिल सकता। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 238, 249 और 45 के तहत एफआईआर दर्ज की है।
और पढ़ें: अंकिता भंडारी हत्याकांड के खुलासों के बीच भाजपा का बेटी बचाओ नारा खोखला: कांग्रेस
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह एफआईआर अंकिता के माता-पिता की ओर से दर्ज होनी चाहिए थी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि एफआईआर में नामित व्यक्ति समाज में सम्मानित है, लेकिन बेहतर होता कि शिकायत अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह की इच्छा के अनुसार दर्ज की जाती। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह अंकिता के पिता को बुलाकर सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से उनकी मंशा के अनुरूप शिकायत तैयार करे।
वहीं, विपक्षी दलों ने मांग की है कि सीबीआई जांच किसी वर्तमान सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज की निगरानी में कराई जाए। इस मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने रविवार को “उत्तराखंड बंद” का आह्वान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस इस बंद का समर्थन करेगी। गढ़वाल रेंज के आईजीपी राजीव स्वरूप ने बताया कि बंद के मद्देनजर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं और लोगों से सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट न करने की अपील की गई है।
और पढ़ें: उत्तराखंड में छात्रा एंजेल चकमा की हत्या पर त्रिपुरा में विरोध प्रदर्शन तेज