ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल से बचाए गए पांच नन्हे ओरंगुटान बुधवार, 9 सितंबर को भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन प्राणी उद्यान पहुंच गए। भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाने वाले इन वन्यजीवों को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित बचाने के बाद चिड़ियाघर के अधिकारियों को सौंप दिया।
कम उम्र को देखते हुए इन पांचों ओरंगुटान की देखभाल नंदनकानन के सेंटर फॉर रियरिंग एनिमल बेबीज में की जाएगी। यह केंद्र अनाथ और बचाए गए छोटे वन्यजीवों के पालन-पोषण के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
इनमें दो मादा और तीन नर ओरंगुटान हैं और सभी की उम्र करीब एक वर्ष बताई गई है। चिड़ियाघर पहुंचने के बाद उनके खेलकूद और मासूम हरकतों ने अधिकारियों और आगंतुकों का ध्यान खींच लिया। कभी वे एक-दूसरे से लिपटते नजर आए तो कभी खेलते हुए इधर-उधर घूमते दिखे। बोतल से दूध पीते इन नन्हे ओरंगुटानों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
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वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने बताया कि वन गश्ती दल ने मंगलवार सुबह इन जानवरों को बचाया था। उन्होंने कहा कि ओरंगुटान भारत में नहीं पाए जाते और मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, बोर्नियो और सुमात्रा के वर्षावनों में पाए जाते हैं।
मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी गिरोह की आशंका जताते हुए कहा कि प्रत्येक ओरंगुटान की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 20 से 25 लाख रुपये हो सकती है। उन्होंने बताया कि इन्हें हवाई, जल या रेल मार्ग से ओडिशा लाए जाने की आशंका है।
ओडिशा सरकार ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) से मामले की जांच का अनुरोध किया है। हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बंदरगाहों के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से ओरंगुटानों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और उन्हें परेशान न करने की अपील की है।
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