गुजरात में मछुआरों को राहत, डीजल वैट छूट योजना से 20 मीटर लंबाई की शर्त हटाई गई
गुजरात सरकार ने मछली पकड़ने वाली यांत्रिक नावों के लिए लागू डीजल वैट राहत योजना में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि अब नावों की लंबाई को लेकर पहले से लागू 20 मीटर की सीमा समाप्त कर दी जाएगी। इस निर्णय से राज्य की 18 हजार से अधिक पंजीकृत यांत्रिक मछली पकड़ने वाली नावों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता और मंत्री जीतू वाघाणी ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि अब सभी प्रकार की यांत्रिक मछली पकड़ने वाली नावें, जिनमें गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली नौकाएं भी शामिल हैं, डीजल पर वैट राहत योजना का लाभ ले सकेंगी। हालांकि, इसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा।
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नई व्यवस्था के तहत नाव मालिकों को अपनी नौकाओं का पंजीकरण Real Craft Portal पर कराना होगा। इसके साथ ही उनके पास वैध मछली पकड़ने का लाइसेंस होना जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से राज्य के मछुआरा समुदाय को आर्थिक राहत मिलेगी और समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
पहले इस योजना का लाभ केवल उन यांत्रिक नावों को मिलता था, जिनकी लंबाई 20 मीटर से कम थी। इस कारण बड़ी नावों और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को योजना से बाहर रहना पड़ता था। अब इस प्रतिबंध को हटाने से अधिक संख्या में नाव मालिक सरकारी सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
गुजरात में बड़ी संख्या में लोग समुद्री मछली पालन पर निर्भर हैं। डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण मछुआरों की लागत लगातार बढ़ रही थी। सरकार के इस फैसले को मछुआरा समुदाय के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है।
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