हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने रविवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में लिए गए कुछ नीतिगत निर्णयों ने भारत की आर्थिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय संप्रभुता को प्रभावित किया है।
मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने के बजाय कुछ फैसलों ने देश को आर्थिक निर्भरता की ओर धकेला है। उनके अनुसार, विदेश नीति केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसका सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता पर भी पड़ता है।
विक्रमादित्य सिंह ने यह भी कहा कि भारत को अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखते हुए ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जो देश के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक संप्रभुता किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होती है, और इसे कमजोर करना देश के भविष्य के लिए चिंताजनक संकेत है।
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उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि विदेश नीति के फैसलों में राज्यों और विशेषज्ञों की भी राय ली जाए, ताकि एक संतुलित और मजबूत दृष्टिकोण विकसित किया जा सके। मंत्री ने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को अधिक सतर्क और आत्मनिर्भर नीति अपनाने की आवश्यकता है।
हालांकि, इस बयान पर राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया आने की संभावना है, क्योंकि विदेश नीति जैसे संवेदनशील विषय पर केंद्र और विपक्ष के बीच अक्सर मतभेद देखने को मिलते हैं।
फिलहाल, विक्रमादित्य सिंह के बयान ने एक बार फिर केंद्र की नीतियों पर बहस को तेज कर दिया है और राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है।
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