दिसंबर महीने में भारत के घरेलू कोयला उत्पादन में साल-दर-साल आधार पर करीब 3.6% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह उत्पादन न केवल पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक रहा, बल्कि सरकार द्वारा तय किए गए मासिक लक्ष्य को भी पार कर गया। मानसून से जुड़ी बाधाओं के कम होने के बाद कोयला उत्पादन में यह तेज़ी देखने को मिली। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में दिसंबर के अंत तक कुल उत्पादन में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिसका कारण पिछले वर्ष लंबे समय तक चला मानसून बताया गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में भारत ने कुल 101.45 मिलियन टन (एमटी) कोयले का उत्पादन किया। यह पिछले साल दिसंबर में हुए 97.94 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में 3.6% अधिक है। इस आंकड़े में सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी अनुषंगी इकाइयों के साथ-साथ सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL), कैप्टिव माइंस और अन्य स्रोतों से होने वाला उत्पादन भी शामिल है। दिसंबर महीने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित उत्पादन लक्ष्य 87.06 मिलियन टन था, जिसे वास्तविक उत्पादन ने काफी हद तक पीछे छोड़ दिया।
हालांकि, उत्पादन में बढ़ोतरी के बावजूद दिसंबर में कुल कोयला डिस्पैच यानी आपूर्ति की रफ्तार कुछ धीमी रही। इसका मुख्य कारण बिजली क्षेत्र को कोयले की कम आपूर्ति रहा। ऊर्जा क्षेत्र में मांग में उतार-चढ़ाव और मौसमी कारणों के चलते बिजली संयंत्रों द्वारा अपेक्षाकृत कम कोयला उठाया गया, जिससे कुल डिस्पैच प्रभावित हुआ।
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विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून खत्म होने के बाद खनन गतिविधियों में तेजी आई है, जिसका असर दिसंबर के उत्पादन आंकड़ों में दिख रहा है। हालांकि, वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में लंबे मानसून के कारण खनन और परिवहन प्रभावित हुआ था, जिससे पूरे वित्त वर्ष के आंकड़ों पर दबाव बना हुआ है।
सरकार का फोकस आने वाले महीनों में कोयला उत्पादन और आपूर्ति दोनों को संतुलित रखने पर है, ताकि बिजली उत्पादन और औद्योगिक मांग को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके।
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