भारत और ईरान अपने द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर पूरे वर्ष चलने वाले कार्यक्रमों की एक श्रृंखला शुरू करने की योजना बना रहे हैं। नई दिल्ली में कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, इन कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देश अपने ऐतिहासिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करने पर जोर देंगे।
इन समारोहों की औपचारिक शुरुआत ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की भारत यात्रा से होगी, जो इस महीने के अंत में प्रस्तावित है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को नई गति देने के रूप में देखी जा रही है। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान भारत और ईरान कई अहम क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
विदेश मंत्री अराघची की यात्रा भारत और ईरान को खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता, पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति, कनेक्टिविटी परियोजनाओं और अफगानिस्तान में भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श का अवसर देगी। इसके अलावा, चाबहार बंदरगाह जैसी रणनीतिक परियोजनाओं और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के प्रयासों पर भी बातचीत होने की संभावना है।
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भारत और ईरान के बीच संबंध सदियों पुराने सभ्यतागत और सांस्कृतिक रिश्तों पर आधारित रहे हैं। दोनों देशों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग किया है और ऊर्जा, व्यापार, परिवहन तथा क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को लगातार आगे बढ़ाया है।
75वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रस्तावित कार्यक्रमों को न केवल अतीत की साझेदारी का उत्सव माना जा रहा है, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी की दिशा तय करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी माना जा रहा है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह वर्ष दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
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