अमेरिकी व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारत “क्रेमलिन के लिए तेल धन शोधन केंद्र (ऑयल मनी लॉन्ड्रोमैट) बन गया है।” नवारो ने सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट करते हुए भारत की विदेश नीति और रूस के साथ इसके ऊर्जा व्यापार को निशाने पर लिया।
नवारो ने कहा, “यदि भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, वास्तव में अमेरिका का रणनीतिक साझेदार बनना चाहता है, तो उसे वैसा ही व्यवहार करना होगा।” उनका आरोप है कि रूस के कच्चे तेल के आयात और उसके पुनः निर्यात या रिफाइन उत्पादों के जरिए भारत रूस को पश्चिमी प्रतिबंधों से बचाने में मदद कर रहा है।
अमेरिका और यूरोपीय देशों ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और रूसी तेल पर निर्भरता घटाने की अपील की है। हालांकि, भारत ने बार-बार यह कहा है कि उसका ऊर्जा व्यापार राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों के आधार पर है, न कि किसी भू-राजनीतिक दबाव में।
और पढ़ें: टैरिफ विवाद के बीच पीएम मोदी ने ट्रंप के चार कॉल नहीं उठाए: रिपोर्ट
नवारो की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और अमेरिका के संबंध रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम छू रहे हैं। लेकिन इस तरह के आरोप दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा कर सकते हैं।
भारत सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
और पढ़ें: भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार, रूसी तेल और मध्यस्थता दावे प्रमुख मुद्दे : जयशंकर