भारत ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वर्ष 2011 से 2020 के बीच 2.176 करोड़ हेक्टेयर (21.76 मिलियन हेक्टेयर) क्षतिग्रस्त और वनों से रहित भूमि का पुनर्स्थापन किया है।
इस उपलब्धि के साथ भारत ने अपने बॉन चैलेंज लक्ष्य का लगभग 84 प्रतिशत पूरा कर लिया है। बॉन चैलेंज के तहत भारत ने वर्ष 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर (26 मिलियन हेक्टेयर) वन और क्षतिग्रस्त भूमि को पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रगति भारत की वन संरक्षण नीतियों, सामुदायिक भागीदारी और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। इस प्रक्रिया में वनीकरण, पुनर्वनीकरण और भूमि सुधार जैसी गतिविधियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने संयुक्त रूप से वनों की गुणवत्ता सुधारने और भूमि क्षरण को रोकने के लिए कई कार्यक्रम चलाए हैं। इनमें वृक्षारोपण अभियान, हरित भारत मिशन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि न केवल जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करेगी, बल्कि जैव विविधता संरक्षण, जल संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत करेगी।
हालांकि, रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि शेष लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आने वाले वर्षों में और तेज प्रयासों की आवश्यकता होगी, ताकि 2030 तक पूर्ण पुनर्स्थापन लक्ष्य हासिल किया जा सके।
यह प्रगति भारत को वैश्विक स्तर पर वन संरक्षण और जलवायु कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देशों की श्रेणी में और मजबूत करती है।
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