भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से आतंकवाद, उग्रवाद और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त एवं सिद्धांत आधारित रुख अपनाने का आह्वान किया। साथ ही भारत ने अधिक समावेशी, संतुलित और प्रतिनिधित्वपूर्ण बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की आवश्यकता पर भी जोर दिया। यह बात किर्गिज़ गणराज्य के चोलपोन-अता में आयोजित एससीओ विदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कही।
बैठक को संबोधित करते हुए कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि एससीओ को अपने मूल उद्देश्यों के अनुरूप आतंकवाद, अलगाववाद, उग्रवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की सभी प्रकार और स्वरूपों, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद की बिना किसी शर्त और भेदभाव के स्पष्ट निंदा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आतंकवादी नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों, कट्टरपंथ, आतंक वित्तपोषण और मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाकर क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक एकीकरण को मजबूत किया जा सकता है।
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विदेश राज्य मंत्री ने एससीओ की 25वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संगठन आज वैश्विक भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने एससीओ की अध्यक्षता के लिए किर्गिज़स्तान को बधाई देते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के दौर में उसका नेतृत्व महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि एससीओ के प्रति भारत की नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी एंड अपॉर्च्युनिटी" के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय शांति, आर्थिक विकास, सहयोग और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना है।
कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, जलवायु परिवर्तन, सशस्त्र संघर्ष और असमान आर्थिक सुधार जैसी चुनौतियों का सबसे अधिक असर ग्लोबल साउथ पर पड़ा है। इन समस्याओं से निपटने के लिए बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और सदस्य देशों के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी), चाबहार बंदरगाह, तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (टापी) गैस पाइपलाइन और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा ग्रिड जैसी परियोजनाओं का समर्थन दोहराया। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी संपर्क परियोजनाएं पारदर्शिता, समावेशिता, वित्तीय स्थिरता तथा देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए।
भारत ने डिजिटल नवाचार, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, योग, पारंपरिक चिकित्सा और युवा आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की। कीर्ति वर्धन सिंह ने घोषणा की कि भारत इस वर्ष पहला एससीओ सभ्यता संवाद मंच आयोजित करेगा, जिसके उद्घाटन सत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। उन्होंने सभी सदस्य देशों को इसमें सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।
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