अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने दावा किया है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। लटनिक का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता ठप पड़ने और टैरिफ बढ़ने की आशंकाएं तेज हो गई हैं।
लटनिक की टिप्पणी कुछ दिन बाद आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि वह भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से खुश नहीं हैं और वॉशिंगटन नई दिल्ली पर “बहुत जल्दी” टैरिफ बढ़ा सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय दी गई थी, जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी।
अब तक इस व्यापार समझौते को लेकर छह दौर की बातचीत हो चुकी है। प्रस्तावित समझौते में भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को सुलझाने के लिए एक ढांचा समझौता भी शामिल था। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद दोनों पक्ष किसी अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंच सके।
और पढ़ें: स्पष्टता का इंतज़ार, नियमों के अनुरूप ही तेल खरीद पर विचार करेंगे: वेनेजुएला तेल पर रिलायंस
गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को एक पॉडकास्ट में लटनिक ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया था कि वह राष्ट्रपति ट्रंप को फोन कर समझौते को अंतिम रूप दें। लेकिन उनके मुताबिक, भारत इस कदम को उठाने में “असहज” था, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने फोन नहीं किया।
लटनिक ने यह भी कहा कि अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ व्यापार समझौते कर लिए, जबकि उन्हें उम्मीद थी कि भारत के साथ समझौता इन देशों से पहले हो जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ सौदे किए और कई समझौतों की घोषणा की। हमें लगा था कि भारत का समझौता पहले हो जाएगा, इसलिए दरें ज्यादा स्तर पर तय हो गईं। बाद में भारत ने कहा कि वह तैयार है, लेकिन तब तक हालात बदल चुके थे।”
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि भारत, जिसे कभी अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था, अब कड़े टैरिफ और बढ़ते तनाव का सामना कर रहा है।
और पढ़ें: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मलयालम भाषा विधेयक 2025 वापस लेने की अपील की