ईरान में खराब होती आर्थिक स्थिति और मुद्रा के भारी अवमूल्यन के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं, जिनमें अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है। विदेश स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, इन घटनाओं में 1,200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
मंगलवार (6 जनवरी 2026) को तेहरान के ऐतिहासिक ग्रैंड बाजार में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने धरना दिया। यह बाजार सदियों से ईरान की आर्थिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बाजार के भीतर बैठकर विरोध जताया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर उन्हें तितर-बितर कर दिया। इस दौरान बाजार की अधिकांश दुकानें बंद रहीं।
प्रदर्शन ऐसे समय में तेज हुए हैं, जब ईरानी रियाल ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। मंगलवार को एक डॉलर के मुकाबले रियाल 14.6 लाख तक गिर गया। इससे पहले दिसंबर में यह 14 लाख प्रति डॉलर के स्तर को छू चुका था। 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले एक डॉलर लगभग 70 रियाल के बराबर था।
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ईरान के सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने हालात को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार अकेले इस संकट को संभालने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यथार्थवादी फैसले नहीं लिए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
इस बीच, इलाम प्रांत में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित गोलीबारी में कई लोगों की मौत की खबरें हैं। सोशल मीडिया पर अस्पतालों में छापेमारी के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनकी अमेरिका समेत कई देशों ने आलोचना की है।
केंद्रीय बैंक द्वारा सब्सिडी वाले डॉलर विनिमय दर में कटौती के बाद खाद्य पदार्थों और जरूरी वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। खाने के तेल, पनीर और चिकन जैसी वस्तुओं के दाम दोगुने हो गए हैं, जबकि कई दुकानों में सामान की कमी देखी जा रही है।
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