कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार छात्रों के मुद्दों और कथित पुलिस कार्रवाई पर चर्चा के लिए तैयार नहीं होती है तो संसद का मानसून सत्र प्रभावित हो सकता है।
जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी दलों की एकजुटता और समर्थन संसद के बाहर तथा अंदर मजबूती से दिखाई दिया है। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कथित कार्रवाई पर बयान दें।
रमेश ने कहा कि विपक्ष की मांग केवल बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के साथ हुए कथित अत्याचारों पर विस्तृत चर्चा भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और उनकी आवाज सुननी चाहिए।
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कांग्रेस नेता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित परीक्षा पेपर लीक और नीट विवाद जैसे मुद्दों ने देश के लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।
जयराम रमेश ने कहा, “हमारी मांग रही है और आगे भी रहेगी कि गृह मंत्री बयान दें और शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली तथा दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों पर की गई कार्रवाई पर विस्तृत चर्चा हो।” उन्होंने कहा कि अगर सरकार अपने मौजूदा रुख पर कायम रहती है तो संसद का सत्र पूरी तरह बाधित हो सकता है।
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनके खिलाफ बल प्रयोग किया, जबकि पुलिस ने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे।
इस घटना के बाद विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हैं और छात्रों के मुद्दों पर संसद में चर्चा की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि युवाओं से जुड़े मामलों पर सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी।
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