कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केआईएडीबी (कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड) भूमि विवाद मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अवकाशकालीन पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए बहाल करते हुए संबंधित पक्षों को अपने तर्क रखने का अवसर देने का निर्देश दिया है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति के. एस. हेमलेखा की खंडपीठ ने सुनाया। खंडपीठ व्यवसायी तेजराज गुलेचा द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील 12 मई को एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं और पूर्व में पारित आदेशों का परीक्षण किया। इसके बाद खंडपीठ ने माना कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए विस्तृत सुनवाई आवश्यक है। इसलिए अवकाशकालीन पीठ के आदेश को रद्द करते हुए मामले को पुनः सुनवाई के लिए भेजा गया।
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केआईएडीबी से जुड़े भूमि विवाद लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं और इनमें भूमि अधिग्रहण, स्वामित्व अधिकार तथा औद्योगिक विकास परियोजनाओं से जुड़े कई मुद्दे शामिल रहते हैं। इस मामले में भी संबंधित पक्षों के बीच भूमि के अधिकारों और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर विवाद चल रहा है।
अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले की दोबारा सुनवाई होगी, जिसमें सभी पक्षों को अपना पक्ष विस्तार से रखने का अवसर मिलेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा सुनवाई के बाद इस विवाद के महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्टता सामने आ सकती है।
फिलहाल अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और विस्तृत सुनवाई के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
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