कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार (22 जनवरी, 2026) को आरोप लगाया कि सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को निरस्त किया जाना, महात्मा गांधी के नाम और विचारों को सार्वजनिक स्मृति से हटाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी संसद के बजट सत्र में इस मुद्दे को पूरी मजबूती के साथ उठाएगी।
रचनात्मक कांग्रेस द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री खड़गे ने लोगों से एकजुट होने की अपील की और कहा कि सरकार को नया कानून लागू नहीं करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करने का उद्देश्य न केवल महात्मा गांधी के नाम को कमजोर करना है, बल्कि ग्राम स्वराज की अवधारणा को भी समाप्त करना है।
खड़गे ने कहा, “बजट सत्र में हम इस मुद्दे पर संघर्ष करेंगे,” और सरकार पर मनरेगा जैसे जनहितकारी कानून को खत्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कानून करोड़ों ग्रामीण गरीबों को रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अधिकार देता है।
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इस सम्मेलन में देशभर से आए मनरेगा श्रमिकों ने भाग लिया। श्रमिक अपने-अपने कार्यस्थलों से मुट्ठी भर मिट्टी लेकर आए, जिसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में पौधों में डाला गया। यह प्रतीकात्मक कदम मनरेगा से जुड़ी आजीविका और धरती से रिश्ते को दर्शाने के लिए उठाया गया।
कांग्रेस पार्टी ने 10 जनवरी को ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नाम से 45 दिनों का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। यह अभियान यूपीए सरकार के कार्यकाल में बने अधिकार आधारित कानून मनरेगा को खत्म किए जाने के विरोध में चलाया जा रहा है।
कांग्रेस की मांग है कि ‘विकसित भारत – रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G]’ अधिनियम को वापस लिया जाए और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए, जिसमें काम का अधिकार और पंचायतों की भूमिका सुनिश्चित हो।
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