बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को सरकारी अस्पतालों की जर्जर हालत का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। इस बार यह मुद्दा बीजेपी की नई विधायक और प्रसिद्ध लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने उठाया। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के सरकारी अस्पताल की खराब स्थिति को लेकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से सवाल किया। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर उन्होंने उनसे दोबारा स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
मिथिलांचल की मशहूर गायिका मैथिली ठाकुर ने नवंबर में अलीनगर सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र के अस्पताल की हालत बेहद खराब है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की छत से प्लास्टर गिरता रहता है, दीवारों में गहरी दरारें हैं और बारिश के मौसम में वार्डों में पानी भर जाता है। इसके बावजूद मरीजों का इलाज वहीं किया जा रहा है, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को भी उसी भवन में रखा जाता है, जो लोगों की जान के लिए खतरा है।
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मैथिली ठाकुर ने कहा कि मंत्री का जवाब उन्हें संतोषजनक नहीं लगा क्योंकि रिपोर्ट में भवन को खराब नहीं बताया गया, जबकि उन्होंने खुद उसकी खराब हालत देखी है। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में अब कोई एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है, जबकि पहले दो डॉक्टर मौजूद थे।
उन्होंने सरकार से पूछा कि जब हर साल स्वास्थ्य बजट बढ़ रहा है तो अस्पतालों की हालत ऐसी क्यों है? क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है? मंत्री ने जवाब में कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और कई अस्पतालों के नए भवन स्वीकृत किए जा चुके हैं।
हालांकि, विधायक ने फिर कहा कि उनके क्षेत्र का अस्पताल वर्षों से सूची में है, लेकिन अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। उनकी बार-बार की मांग के बाद सदन में माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया और स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा। लोगों ने इस मुद्दे को उठाने के लिए विधायक की सराहना की।
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