नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती नहीं बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों से "भारी हाथ" से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता के साथ निपटना चाहिए।
गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान मनीष तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और किसी भी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई से बचना चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले की व्यापक जांच और देश की परीक्षा एवं शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग की। उनका कहना था कि यह केवल एक परीक्षा तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा प्रश्न बन चुका है।
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मनीष तिवारी ने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में बार-बार ऐसी अनियमितताएं सामने आती हैं, तो इसकी गहराई से समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जेपीसी सभी पहलुओं की जांच कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुझाव दे सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों को मिलकर समाधान तलाशना चाहिए। सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कायम रहे।
नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा लगातार गूंज रहा है। विपक्ष परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार पर दबाव बना रहा है।
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