छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने एक और ‘शिक्षादूत’ की हत्या कर दी है। यह इस साल का छठा ऐसा मामला है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ‘शिक्षादूतों’ को पुलिस के गुप्त सूत्र होने के संदेह में निशाना बनाया जा रहा है।
बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) पी. सुंदरराज ने कहा कि नक्सली शिक्षकों की हत्या कर रहे हैं क्योंकि वे स्थानीय जनता को शिक्षा से वंचित करना चाहते हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों के माध्यम से स्थानीय बच्चों तक शिक्षा पहुंच रही है और नक्सलियों का मकसद इस माध्यम को खत्म करना है।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षकों की सुरक्षा लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। शिक्षकों को अक्सर जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं और कई बार उन्हें डराने-धमकाने के लिए हथियारों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इस वजह से कई शिक्षक अपने गांव छोड़ने या वहां पढ़ाने से डरने लगे हैं।
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पुलिस और राज्य प्रशासन ने इस पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी है और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करने की योजना बनाई है। इसमें सुरक्षा बलों की तैनाती, आवासीय सुरक्षा और नियमित गश्त शामिल हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि नक्सलियों द्वारा शिक्षकों को निशाना बनाना न केवल शिक्षा व्यवस्था पर असर डालता है, बल्कि समाज के विकास और बच्चों के भविष्य के लिए भी खतरा पैदा करता है।
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