उत्तर कश्मीर के बांदीपोरा जिले में बुधवार को एक भीषण बादल फटने की घटना सामने आई, जिससे दूरदराज स्थित गुरेज़ क्षेत्र की तुलैल घाटी के तरतेई किलो गांव में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। अचानक और लगातार आए पानी के तेज बहाव तथा मलबे ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा में दर्जनों रिहायशी मकान क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि पानी में डूब गई। राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है।
बाढ़ जैसी स्थिति से ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई। लोग अपने बच्चों और पशुओं को बचाते हुए घर छोड़कर ऊंचे स्थानों की ओर भागने लगे। कई घंटों तक पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
इससे पहले 4 जून को जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के महौर उपखंड के बथोई इलाके में भी बादल फटने की घटना हुई थी। वहां भी अचानक आए पानी और मलबे के कारण कई घरों को नुकसान पहुंचा था, हालांकि किसी की जान नहीं गई थी।
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अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में यह पांचवीं बादल फटने की घटना है। मंगलवार को डोडा, किश्तवाड़ और पुंछ जिलों में चार अलग-अलग स्थानों पर बादल फटे थे, जिससे कई इलाकों में अचानक बाढ़ और सड़क अवरोध की स्थिति पैदा हो गई थी।
रियासी के जिला विकास आयुक्त (डीडीसी) ने बताया कि प्रभावित गांवों में राहत एवं बचाव दल तुरंत पहुंच गए और राहत कार्य शुरू कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी स्थिति की समीक्षा की और रियासी के उपायुक्त से बातचीत कर प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है। फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
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