मध्य प्रदेश सरकार ने महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य की पेंशन नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन के तहत अब तलाकशुदा बेटियां भी अपने माता-पिता की फैमिली पेंशन पाने की पात्र होंगी। इस फैसले को सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जो अलगाव के बाद आर्थिक अस्थिरता झेल रही महिलाओं को दीर्घकालिक राहत देगा।
कैबिनेट बैठक के बाद उद्योग मंत्री चैतन्य कश्यप ने जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने इस निर्णय में सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि कई महिलाएं तलाक के बाद अपने मायके लौट आती हैं और आर्थिक असुरक्षा से जूझती हैं। नया नियम उन्हें वित्तीय सहारा देगा और सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करेगा।
पहले पेंशन नियमों में मौजूद तकनीकी प्रावधानों के कारण तलाकशुदा बेटियां फैमिली पेंशन का दावा नहीं कर पाती थीं, जिससे कई महिलाओं के पास स्थायी आय का कोई भरोसेमंद स्रोत नहीं रहता था। कैबिनेट द्वारा मंजूर यह संशोधन इस स्थिति को बदल देगा और राज्य की हजारों महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान करेगा।
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राज्य सरकार का मानना है कि यह निर्णय सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि गरिमा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण और समावेशी कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां सभी फैमिली पेंशन के दायरे में आएंगी। साथ ही सरकार पेंशन प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाएगी ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बिना देरी के लाभ मिल सके।
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