भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) को घोषणा की कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए इसे 5.25% करने का फैसला लिया है। यह निर्णय अक्टूबर नीति के बाद से अर्थव्यवस्था में तेजी से आई डिसइंफ्लेशन (मुद्रास्फीति में गिरावट) को देखते हुए लिया गया।
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि इस वर्ष की पहली छमाही में मुद्रास्फीति मात्र 2.2% पर और विकास दर 8% के आसपास रही है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक दुर्लभ ‘गोल्डीलॉक्स पीरियड’ (अर्थात अनुकूल संतुलित स्थिति) का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि इस समय न तो मुद्रास्फीति दबाव में है और न ही वृद्धि कमजोर, जिससे मौद्रिक नीति को समायोजित करने का अनुकूल अवसर मिला है।
एमपीसी ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी न्यूट्रल स्टांस यानी तटस्थ रुख को जारी रखेगी। इसका अर्थ है कि समिति आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर दरों में न तो आक्रामक वृद्धि करेगी और न ही तेज कटौती करेगी।
और पढ़ें: भारत यात्रा के दौरान फ्लाइंग क्रेमलिन बना दुनिया का सबसे अधिक ट्रैक किया गया विमान
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि कीमतों में स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों में निरंतर सुधार के चलते आगामी महीनों में नीति का ध्यान स्थिरता और टिकाऊ विकास पर रहेगा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखने तथा उधार लागत को संतुलित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। नई दरों का असर उपभोक्ता ऋणों, होम लोन और कॉरपोरेट लेंडिंग पर आने वाले महीनों में देखने को मिल सकता है।
और पढ़ें: आयरलैंड में ज़ेलेंस्की के विमान के पास दिखे 5 रहस्यमयी ड्रोन, सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप