भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी (Admiral Dinesh K Tripathi) ने शनिवार को समुद्री सुरक्षा और शक्ति प्रदर्शन में एयरक्राफ्ट कैरियर की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर (Aircraft Carriers) और कैरियर बैटल ग्रुप (CBGs) आज भी समुद्री रणनीति का केंद्रीय हिस्सा बने हुए हैं और यह समुद्री क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने तथा संभावित खतरों को रोकने (maritime deterrence) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा पहले से अधिक जटिल हो गई है, ऐसे में एयरक्राफ्ट कैरियर किसी भी देश की समुद्री शक्ति का प्रमुख प्रतीक है। यह न केवल दूर-दराज समुद्री क्षेत्रों में सैन्य उपस्थिति सुनिश्चित करता है, बल्कि संकट के समय तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता भी प्रदान करता है।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अभियान भारत की रणनीतिक तैयारी और समुद्री शक्ति के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि संगठित कैरियर बैटल ग्रुप किस तरह जटिल परिस्थितियों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
और पढ़ें: लखनऊ की नौसेना शौर्य वाटिका बनेगी प्रेरणा का केंद्र: राजनाथ सिंह
एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी कहा कि भारत, एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र होने के नाते, हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और प्रभाव को मजबूत करने के लिए लगातार नौसैनिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। एयरक्राफ्ट कैरियर इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय नौसेना आने वाले वर्षों में अपनी तकनीकी और सामरिक क्षमताओं को और उन्नत करेगी ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
और पढ़ें: भारत ने ओमान तट के पास अपने वाणिज्यिक जहाज पर हमले की निंदा की, घटना को अस्वीकार्य बताया