लंबे समय तक समुद्र में विशाल युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर रहना सेना के सबसे कठिन कार्यों में से एक माना जाता है। ऐसे कठिन और अलग-थलग माहौल में संसाधनों का सही उपयोग बेहद जरूरी होता है, खासकर पोषण के मामले में, ताकि नाविक और अधिकारी मानसिक व शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रह सकें।
नौसेना के जहाजों पर जहाज के रसोईघर को “गैली” कहा जाता है। यह कोई सामान्य रसोई नहीं होती, बल्कि एक अत्यधिक व्यवस्थित और दक्ष प्रणाली होती है, जहां हर दिन सैकड़ों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है।
समुद्र में अक्सर खराब मौसम, सीमित संसाधन और लंबे मिशन के कारण भोजन को विशेष रूप से डिजाइन किया जाता है। भोजन में ऐसे पदार्थ शामिल किए जाते हैं जो लंबे समय तक सुरक्षित रहें और ऊर्जा से भरपूर हों। इनमें ओट्स, अंडे, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ और सूखे अनाज प्रमुख होते हैं।
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गैली का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होता है कि नाविकों की ऊर्जा और एकाग्रता बनी रहे। कई अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक लॉजिस्टिक्स कार्यक्रमों, जैसे अमेरिकी नौसेना के फ्लीट एंड फैमिली रेडीनेस (एफएफआर) सिस्टम में भी यही सिद्धांत अपनाया जाता है कि भोजन पोषण से भरपूर और लंबे समय तक टिकाऊ होना चाहिए।
जहाज पर मौजूद रसोइये यानी नेवी शेफ्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे सीमित संसाधनों में भी स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन तैयार कर सकें। खराब मौसम और समुद्री परिस्थितियों के बीच भी उन्हें भोजन की गुणवत्ता बनाए रखनी होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र में तैनात सैनिकों के लिए भोजन सिर्फ जरूरत नहीं बल्कि मानसिक संतुलन का भी एक अहम हिस्सा होता है। स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है।
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