कई शिकायतों और अचानक किए गए निरीक्षण के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (एसएमवीडीआईएमई) को वर्ष 2025-26 सत्र के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति वापस ले ली है। एनएमसी ने मंगलवार देर रात यह कार्रवाई संस्थान में गंभीर खामियां पाए जाने के आधार पर की।
एनएमसी के अनुसार, कॉलेज के बुनियादी ढांचे में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। इनमें पर्याप्त फैकल्टी की कमी, क्लीनिकल मटीरियल की अनुपलब्धता और अन्य शैक्षणिक मानकों का पालन न होना शामिल है। इन्हीं कारणों के चलते पहले दी गई ‘लेटर ऑफ परमिशन’ (एलओपी) को वापस लेने का फैसला किया गया।
इस मामले में श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने भी अहम भूमिका निभाने का दावा किया है। करीब 60 प्रो-आरएसएस और प्रो-बीजेपी संगठनों के इस समूह ने कहा कि संस्थान में किया गया अचानक निरीक्षण उनके अनुरोध पर ही कराया गया था। समिति ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में दाखिलों को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।
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विवाद के बीच एनएमसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए एसएमवीडीआईएमई में जिन छात्रों को नीट (NEET) में उनकी मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया गया था, उन्हें नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। आयोग के निर्देशों के अनुसार, इन छात्रों को सक्षम प्राधिकरण द्वारा केंद्र शासित प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल संस्थानों में सुपरन्यूमरेरी सीटों पर समायोजित किया जाएगा।
एनएमसी के इस फैसले से मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। आयोग का कहना है कि वह देशभर में मेडिकल शिक्षा के मानकों से कोई समझौता नहीं करेगा और जहां भी गंभीर खामियां पाई जाएंगी, वहां सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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