उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम की आलोचना की गई थी। प्योंगयांग ने एजेंसी पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने कहा कि आईएईए उत्तर कोरिया के खिलाफ पक्षपातपूर्ण मानदंड अपना रही है। उन्होंने अमेरिका की कथित परमाणु गतिविधियों और दक्षिण कोरिया की परमाणु पनडुब्बी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि एजेंसी ने इन मामलों पर आंखें मूंद लीं, जबकि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया।
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने भी प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि परमाणु शक्ति के रूप में देश की स्थिति ‘अपरिवर्तनीय’ है और उसका परमाणु प्रतिरोध इसे बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
और पढ़ें: अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान सैन्य अभ्यास के बाद उत्तर कोरिया ने दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें
क्या है आईएईए का प्रस्ताव?
आईएईए ने 17 सितंबर को वियना में आयोजित 70वें महासम्मेलन के दौरान प्रस्ताव पारित किया। इसमें कहा गया कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार संपन्न देश का दर्जा नहीं मिल सकता। प्रस्ताव में प्योंगयांग से परमाणु गतिविधियां तत्काल रोकने की अपील भी की गई।
प्रस्ताव के पक्ष में 103 देशों ने मतदान किया, जबकि छह ने विरोध किया और 14 देश मतदान से दूर रहे। चीन और रूस विरोध करने वाले देशों में शामिल थे।
अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने भी उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। तीनों देशों ने कहा कि उत्तर कोरिया का परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करता है।
इसी बीच किम जोंग उन ने प्रमुख हथियार कारखानों का तीन दिवसीय निरीक्षण किया। उन्होंने रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण से सेना में महत्वपूर्ण बदलाव आने का दावा किया।
और पढ़ें: भारत के परमाणु हथियारों का भंडार करीब 190 वारहेड, नई मिसाइलों के लिए 30 अतिरिक्त: रिपोर्ट