देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने बहुचर्चित को-लोकेशन मामले का निपटारा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ कर लिया है। एनएसई ने शुक्रवार को 714.74 करोड़ रुपये की शेष राशि का भुगतान कर दिया। इससे पहले एक्सचेंज 776.47 करोड़ रुपये जमा करा चुका था। दोनों भुगतानों को मिलाकर कुल 1,491.21 करोड़ रुपये की सहमति वाली निपटान राशि पूरी हो गई है।
यह भुगतान ऐसे समय किया गया है जब एक दिन पहले ही सेबी ने एनएसई द्वारा प्रस्तुत संशोधित निपटान प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। एनएसई ने एक बयान में कहा कि पहले जमा कराई गई 776.47 करोड़ रुपये की राशि और 30 जुलाई 2026 की मांग सूचना के आधार पर चुकाए गए 714.74 करोड़ रुपये को कुल 1,491.21 करोड़ रुपये की निपटान राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
एनएसई के निदेशक मंडल ने 30 जुलाई को हुई बैठक में शेष भुगतान को मंजूरी दी थी। इससे पहले एक्सचेंज ने 20 जून 2025 को को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के समाधान के लिए 1,387.39 करोड़ रुपये के प्रस्ताव के साथ दो निपटान आवेदन दायर किए थे। बाद में 13 मार्च 2026 को प्रस्ताव में संशोधन करते हुए कुल निपटान राशि बढ़ाकर 1,491.21 करोड़ रुपये कर दी गई।
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यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब एनएसई अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी में जुटा है। जून 2026 में एक्सचेंज ने सेबी के पास आईपीओ के लिए प्रारूप दस्तावेज दाखिल किए थे। प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) पर आधारित होगा, जिसके तहत मौजूदा शेयरधारक 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेंगे। यह एक्सचेंज की कुल इक्विटी पूंजी का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा है।
चूंकि इस आईपीओ में नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे, इसलिए इसका अनुमानित आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इसके साथ ही यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक बनने की संभावना रखता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि को-लोकेशन विवाद के निपटारे से एनएसई के आईपीओ की राह और अधिक सुगम हो सकती है।
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