जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के हालिया मार्च की सराहना करते हुए इसे राज्य के दर्जे की बहाली की लड़ाई का सबसे मजबूत प्रतीक बताया है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 90 वर्ष की उम्र में फारूक अब्दुल्ला का सड़क पर उतरकर लोगों का नेतृत्व करना जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक लड़ाई और सम्मान की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रेरणादायक दृश्य शायद ही कोई और हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मेरे और मेरे साथियों के लिए कल के प्रदर्शन का सबसे बड़ा प्रतीक हमारे अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला थे। 90 वर्ष की उम्र में उन्होंने हाथ में अपनी छड़ी लेकर हमारा नेतृत्व किया और हमें अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाया, जिसका उद्देश्य हमारी गरिमा और राज्य का दर्जा वापस पाना है।”
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उमर अब्दुल्ला ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला का नेतृत्व यह संदेश देता है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं और अधिकारों की लड़ाई अभी जारी है। उन्होंने कहा कि उम्र कभी भी लोगों की आवाज उठाने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने में बाधा नहीं बन सकती।
नेशनल कॉन्फ्रेंस लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करती रही है। पार्टी का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल करना क्षेत्र की राजनीतिक पहचान, विकास और लोगों के अधिकारों के लिए जरूरी है।
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा हटाने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठती रही है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से लोगों की मांगों को उठाती रहेगी। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका अनुभव और मार्गदर्शन पार्टी तथा जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा।
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