महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चित ‘ऑपरेशन टाइगर’ की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी के भीतर कथित असंतोष के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने उन सांसदों को नया कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जो पार्टी के निर्देश के बावजूद महत्वपूर्ण संसदीय बैठक में शामिल नहीं हुए थे।
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने अनुपस्थित सांसदों से 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि यदि सांसद निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं देते हैं, तो इसे पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के रूप में माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है।
विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद एक महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहे। इनमें नागेश अष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। वहीं अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय राउत बैठक में मौजूद रहे।
और पढ़ें: बागी सांसदों पर आदित्य ठाकरे का हमला, बोले- खुद को बेच दिया, परिवार की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगा दी
इन अनुपस्थितियों के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज हो गई है। शिवसेना के विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि छह सांसदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर विश्वास जताया है और वे उनके गुट के करीब पहुंच चुके हैं।
इस बीच वरिष्ठ नेता संजय राउत ने संकेत दिया है कि पार्टी अनुपस्थित सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई आगे बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पार्टी कानूनी विकल्पों का पूरा उपयोग करेगी।
यह संकट ऐसे समय आया है जब लगभग चार वर्ष पहले हुए विभाजन के बाद शिवसेना (यूबीटी) फिर से आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी हाल ही में भावुक बयान देते हुए कहा कि यदि कार्यकर्ताओं को लगता है कि वह संगठन का नेतृत्व प्रभावी ढंग से नहीं कर पा रहे हैं, तो वह अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।
और पढ़ें: दिल्ली में बैठक से अनुपस्थित रहने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के आवासों पर सुरक्षा बढ़ाई गई