राज्यसभा में मंगलवार (10 फरवरी 2026) को केंद्रीय बजट पर चर्चा के दूसरे दिन विपक्षी सांसदों ने बढ़ती महंगाई और देश में असमानता के मुद्दे को उठाया। विपक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार ने इन समस्याओं को प्रभावी ढंग से संबोधित नहीं किया।
त्रिनमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने देश में बढ़ती असमानता पर विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इसे हल नहीं किया, तो सामाजिक अशांति की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि आम जनता पर बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ रहा है और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (DMK) की सांसद कनिमोझी एन.वी.एन. सोमू ने सोने, पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य की तुलना 2014 और 2026 के बीच की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं और कई उत्पाद आम लोगों की पहुँच से बाहर हो गए हैं।
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वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों ने जवाब में कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) के शासनकाल के विपरीत, नरेंद्र मोदी सरकार ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित किया है और इसी वजह से संसद में अब इस पर चर्चा कम होती है।
विपक्ष का कहना है कि केवल सांख्यिकी या औसत आंकड़ों के आधार पर महंगाई और असमानता के प्रभाव को नहीं देखा जा सकता। आम जनता को राहत देने और सामाजिक असमानता को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
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