ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिन सख्त प्रावधानों वाले गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत इन दोनों को गिरफ्तार किया गया है, वह कानून कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनाया गया था।
महाराष्ट्र के अमरावती जिले के चांदनी चौक इलाके में शनिवार (10 जनवरी 2026) को एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि चुनावों के समय जो लोग खुद को धर्मनिरपेक्ष बताते हैं, वही वास्तव में मुसलमानों, दलितों और आदिवासियों के दुश्मन हैं। उनका आरोप था कि राजनीतिक धर्मनिरपेक्षता का इस्तेमाल केवल वोट हासिल करने के लिए किया जाता है।
ओवैसी ने कहा कि 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने UAPA की धारा 15A के तहत उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि UAPA को तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान संसद में पेश किया था और उस समय संसद में केवल उन्होंने ही इस कानून का विरोध किया था।
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AIMIM प्रमुख ने कहा, “मैंने तब चेतावनी दी थी कि यह कानून पुलिस द्वारा मुसलमानों, दलितों, आदिवासियों और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले बुद्धिजीवियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा। आज वही हो रहा है, इस कानून की आतंकवाद की परिभाषा के कारण ये दोनों युवा पांच साल से जेल में हैं और उन्हें जमानत नहीं मिल रही।”
उन्होंने 85 वर्षीय फादर स्टैन स्वामी का भी जिक्र किया, जिनकी एल्गार परिषद मामले में जेल में रहते हुए मौत हो गई थी। ओवैसी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 2019 में UAPA संशोधन के दौरान भाजपा सरकार का समर्थन किया, जिससे निर्दोष लोगों की जिंदगियां बर्बाद हो रही हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था, जबकि “भागीदारी के स्तर” का हवाला देते हुए पांच अन्य आरोपियों को जमानत दी गई।
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