पाकिस्तान में एक बार फिर तख्तापलट की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। इसकी वजह गृह मंत्री मोहसिन नकवी का हालिया बयान है, जिसमें उन्होंने देश के इतिहास के "सबसे बड़े घोटाले" का खुलासा करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि इस कथित घोटाले में कई न्यायाधीशों और राजनेताओं की संलिप्तता रही है तथा देश की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और पर्दे के पीछे उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है तथा कई स्थानों पर एहतियातन कंटेनर लगाए गए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, मोहसिन नकवी को आसिम मुनीर का करीबी माना जाता है। उनके लगातार बयानों से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पर दबाव बढ़ा है। वहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी नकवी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि गृह मंत्री स्वयं सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं तो सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए।
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इस बीच, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सभी संघीय मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की व्यापक समीक्षा के आदेश दिए हैं। सभी मंत्रालयों से फरवरी 2024 से अब तक की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा मांगा गया है।
पाकिस्तान का इतिहास सैन्य हस्तक्षेपों से भरा रहा है। वर्ष 1958, 1977 और 1999 में सेना ने सीधे सत्ता संभाली थी। इसके अलावा कई बार तख्तापलट की कोशिशें भी हुईं, जिन्हें समय रहते विफल कर दिया गया। मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन की पटकथा दोहराई जा सकती है। हालांकि अब तक किसी आधिकारिक स्तर पर तख्तापलट की पुष्टि नहीं हुई है।
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