प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में महिला आरक्षण कानून को एक समानतामूलक भारत की दिशा में बड़ा संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून ऐसे भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा, जहां सामाजिक न्याय केवल नारा नहीं, बल्कि संस्कृति का हिस्सा होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद एक ऐतिहासिक कदम उठाने के करीब है, क्योंकि 16 से 18 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें महिला आरक्षण कानून में संशोधन पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल नारी शक्ति के सम्मान और भविष्य के संकल्पों को पूरा करने के लिए है।
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ‘नारी शक्ति वंदन’ कार्यक्रम के माध्यम से देश की करोड़ों माताओं और बहनों का आशीर्वाद प्राप्त कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यहां किसी को उपदेश देने नहीं, बल्कि महिलाओं को जागरूक और सशक्त बनाने आए हैं।
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उन्होंने बताया कि व्यापक मांग है कि महिला आरक्षण कानून को हर हाल में 2029 तक लागू किया जाए और इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संसद में विस्तृत चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रयास सभी के सहयोग और सहभागिता से पूरा किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में महिलाओं ने हमेशा नेतृत्व के पदों पर रहते हुए नया इतिहास रचा है। उन्होंने राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री तक महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिकाओं का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने बताया कि देश में 14 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय निकायों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से संवेदनशीलता और जवाबदेही भी बढ़ती है। करीब 21 राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो भारत के लिए गर्व की बात है।
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