प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत में मध्यस्थता की पेशकश की है। क्रेमलिन ने रविवार को यह जानकारी दी। दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों में यह प्रस्ताव रखा।
क्रेमलिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि पुतिन ने मोदी और शी की मध्यस्थता की पेशकश का स्वागत किया। उन्होंने दोनों नेताओं को यूक्रेन संघर्ष की मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी। पेस्कोव ने कहा कि रूस भविष्य में बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना से इनकार नहीं कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मोदी और शी ने यूक्रेन संकट के समाधान में गहरी रुचि दिखाई और समाधान खोजने में मदद के लिए अपने अच्छे कार्यालय उपलब्ध कराने की सक्रिय पेशकश की। रूस के मुताबिक, निकट भविष्य में वार्ता की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता और अक्टूबर में संभावित बातचीत भी संभव हो सकती है।
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क्यों महत्वपूर्ण है यह पेशकश?
नई दिल्ली और बीजिंग पहले भी रूस-यूक्रेन विवाद में बातचीत और मध्यस्थता की जरूरत पर जोर दे चुके हैं। हालांकि, इस समय यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि रूस में जल्द विधायी चुनाव होने की संभावना है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला विधायी चुनाव होगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूस और यूक्रेन के बीच शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास कर चुके हैं। उन्होंने पिछले साल अगस्त में पुतिन के साथ शिखर वार्ता भी की थी, लेकिन कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शनिवार को पुतिन से मिलने की इच्छा जताई थी। हालांकि, पेस्कोव ने ऐसी सीधी बैठक की संभावना से इनकार किया है। पुतिन भी कई बार जेलेंस्की के साथ आमने-सामने वार्ता के प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं।
हाल के महीनों में मॉस्को और कीव ने एक-दूसरे पर लंबी दूरी के हमले तेज किए हैं। इससे युद्ध के शुरुआती दौर के बाद नागरिकों की मौत का आंकड़ा सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। क्षेत्रीय नियंत्रण और अन्य शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं।
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